HBSE Class 12th Business Studies Sample Paper 2024 Answer

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HBSE Class 12th Business Studies Sample / Model Paper 2024 Answer

कक्षा – 12वी                    विषय – Business Studies
समय : 3 घंटे                     पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश –
(1) इस प्रश्न पत्र में 34 प्रश्न हैं।
(2) उत्तर संक्षिप्त और सटीक होने चाहिए।
(3) प्रश्न संख्या 1 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
(4) प्रश्न संख्या 21 से 24 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 से 75 शब्दों में लिखें।
(5) प्रश्न संख्या 25 से 30 तक प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में लिखें।
(6) प्रश्न संख्या 31 से 34 तक प्रत्येक प्रश्न 6 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में लिखें।

प्रश्न संख्या 1 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का है।
1. सान्या एक संस्था के वित्त विभाग का प्रबंधन कर रही है। सान्या प्रबंध के किस स्तर पर काम कर रही है ?
(A) निम्न स्तर
(B) उच्च स्तर
(C) मध्य स्तर
(D) शॉप फ्लोर
उत्तर – (C) मध्य स्तर

2. स्थाई संपत्तियों में निवेश किस प्रकार के निर्णय के रूप में जाना जाता है ?
(A) पूंजी संरचना
(B) पूंजी बजटिंग
(C) कार्यशील पूंजी निर्णय
(D) वित्त व्यवस्था निर्णय
उत्तर – (B) पूंजी बजटिंग

3. “वर्ष 2023 में, कंपनी का उद्देश्य वर्ष 2022 की तुलना में बिक्री में 10% की वृद्धि करना है” यह कथन प्रबंध की किस विशेषता पर प्रकाश डालता है ?
(A) प्रबंध एक अमूर्त शक्ति है।
(B) प्रबंध एक लक्ष्य उन्मुख प्रक्रिया है।
(C) प्रबंध व्यापक है।
(D) प्रबंध एक सतत प्रक्रिया है।
उत्तर – (B) प्रबंध एक लक्ष्य उन्मुख प्रक्रिया है।

4. व्यावसायिक पर्यावरण के महत्व की पहचान करें :
(A) अवसरों की पहचान करने और प्रथम प्रस्तावक के लाभ प्राप्त करने में सहायक
(B) अनिश्चितता
(C) काम में देरी
(D) व्यापक कार्य
उत्तर – (A) अवसरों की पहचान करने और प्रथम प्रस्तावक के लाभ प्राप्त करने में सहायक

5. निम्नलिखित में से किस संवर्धन तकनीक में अधिकतम लचीलापन है ?
(A) विज्ञापन
(B) प्रचार
(C) विक्रय संवर्धन
(D) व्यक्तिगत विक्रय
उत्तर – (D) व्यक्तिगत विक्रय

6. “परिवर्तन बहुत जल्दी-जल्दी हो रहे हैं और इनके बारे में भविष्यवाणी करना मुश्किल है” – इस कथन में व्यावसायिक वातावरण की किस विशेषता पर प्रकाश डाला गया है ?
(A) अनिश्चितता
(B) जटिलता
(C) अंतर संबद्धता
(D) सापेक्षता
उत्तर – (A) अनिश्चितता

7. तारा, एक प्रबंधक को संगठन की प्रक्रिया का निष्पादन करना है। पहले से निर्धारित योजनाओं के अनुसार किए जाने वाले कार्य को पहचानने और विभाजित करने के बाद उसे संगठन प्रक्रिया के किस चरण को करने की आवश्यकता होगी ?
(A) कार्य की पहचान और विभाजन
(B) विभागीकरण
(C) कर्तव्य सौंपना
(D) रिपोर्टिंग संबंध स्थापित करना
उत्तर – (B) विभागीकरण

8. उचित मात्रा में कार्यशील पूंजी व्यवसाय में …………. की सूचक है :
(A) लाभ
(B) कमजोरी
(C) तरलता
(D) हानि
उत्तर – (C) तरलता

9. सही विकल्प का चयन कीजिए :
कथन 1 : प्रबंध व्यापक है।
कथन 2 : वित्तीय के साथ-साथ गैर-वित्तीय संस्थानों में भी प्रबंध की आवश्यकता होती है।
(A) कथन 1 सत्य है लेकिन कथन 2 गलत है।
(B) दोनों कथन असत्य हैं।
(C) दोनों कथन सत्य हैं लेकिन दोनों का एक दूसरे के साथ कोई संबंध नहीं है।
(D) दोनों कथन सत्य हैं और कथन 2 को कथन 1 से निष्कर्ष लिया गया है।
उत्तर – (D) दोनों कथन सत्य हैं और कथन 2 को कथन 1 से निष्कर्ष लिया गया है।

10. नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए :
कथन 1 : परिवहन सेवा समय उपयोगिता बनाने में सहायक है और भंडारण सेवा स्थान उपयोगिता बनाने में सहायक है।
कथन 2 : अच्छी भौतिक वितरण रणनीति समय उपयोगिता के साथ-साथ स्थान उपयोगिता को भी बढ़ाती है।
(A) कथन 1 सत्य हैं और 2 असत्य है।
(B) कथन 2 सत्य है और 1 असत्य है।
(C) दोनों कथन सत्य हैं।
(D) दोनों कथन असत्य हैं।
उत्तर – (C) दोनों कथन सत्य हैं।

11. व्यवसाय के सामाजिक वातावरण का एक उदाहरण दें।
उत्तर – पारिवारिक संरचना, शिक्षा का स्तर, रीति-रिवाज, विश्वास, त्यौहार आदि।

12. बीआईएस (BIS) का पूर्ण रूप लिखें।
उत्तर – Bureau of Indian Standards

13. “प्रबंध के विस्तार” से क्या आशय है ?
उत्तर – अधीनस्थों की संख्या

14. ऋण समता अनुपात के बारे में निर्णय लेते समय सामान्यतः अंशों की तुलना में ……….. सस्ते माने जाते हैं।
उत्तर – ऋणपत्र (डिबेंचर)

15. चालू संपत्ति – चालू दायित्व = ………….
उत्तर – कार्यशील पूंजी

16. शेविंग क्रीम का ट्यूब कंटेनर ………… पैकेजिंग का उदाहरण है।
उत्तर – प्राथमिक

17. नियोजन ………… देखता है जबकि नियन्त्रण …………. देखता है।
उत्तर – आगे, पीछे

18. भारत में नोटबंदी कानूनी वातावरण का प्रभाव है। (सत्य / असत्य)
उत्तर – सत्य

19. प्रचार, संवर्धन मिश्रण का भुगतान किए जाने वाला प्रारूप है। (सत्य / असत्य)
उत्तर – असत्य

20. जमाखोरी, अनुचित व्यापार व्यवहार का एक उदाहरण है। (सत्य / असत्य)
उत्तर – सत्य

प्रश्न संख्या 21 से 24 तक प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 50 से 75 शब्दों में लिखें।
21. “नियुक्तिकरण एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसमें चरणों की एक श्रृंखला शामिल है।” विस्तार से वर्णन करो।
उत्तर – नियुक्तिकरण की प्रक्रिया में निम्नलिखित चरण शामिल हैं :
• मानव संसाधन नियोजन
• भर्ती
• चयन
• प्लेसमेंट
• प्रशिक्षण
• विकास
• पदोन्नति
• स्थानांतरण
• मूल्यांकन
• पारिश्रमिक का निर्धारण

22. “प्रबंध को एक संपूर्ण विज्ञान माना जाता है।” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? क्यों या क्यों नहीं?
उत्तर – प्रबंध को सॉफ्ट साइंस माना जा सकता है क्योंकि :
(i) प्रबंध के पास ज्ञान का एक व्यवस्थित निकाय है।
(ii) विज्ञान की तरह, प्रबंध सिद्धांत वैज्ञानिक शोध एवं अवलोकन पर आधारित होते हैं।
(iii) विज्ञान की तरह प्रबंध के सिद्धांत सार्वभौमिक रूप से लागू होते हैं।
लेकिन :
(i) प्रबंध के सिद्धांत बहुत लचीले होते हैं जबकि शुद्ध विज्ञान के सिद्धांत कठोर होते हैं।
(ii) प्रबंध के सिद्धांतों को रचनात्मकता के साथ लागू किया जाता है क्योंकि ये सिद्धांत मानव के व्यवहार को प्रभावित करते हैं।

23. समझाइए कि किस प्रकार नियंत्रण “बेहतर समन्वय” और “बेहतर नियोजन” में सहायक है ?
उत्तर : बेहतर समन्वय – नियंत्रण असंतुलन को दूर करता है और सभी विभागों के कर्मचारियों की कार्यवाई को एक सामान्य लक्ष्य की दिशा में निर्देशित करता है, इस प्रकार अनुकूलतम प्रदर्शन सुनिश्चित करता है।
• बेहतर योजना – नियंत्रण में पहचानी गई समस्याओं को देखते हुए नियोजन भविष्य की योजनाओं के निर्माण में मदद करता है। इसलिए यह भविष्य की बेहतर योजनाएँ बनाने में मदद करता है।

अथवा

“नियोजन और नियंत्रण के बीच घनिष्ठ और विपरीत पारस्परिक संबंध हैं।” कथन की व्याख्या करें।
उत्तर – नियंत्रण योजनाओं पर निर्भर करता है क्योंकि यह योजनाओं और वास्तविक प्रगति के बीच अंतर को मापता है। नियंत्रण यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति योजना का सख्ती से पालन करे। नियंत्रण में निरंतर निगरानी और जांच यह संभव बनाती है कि हर कोई योजना का पालन करे। दूसरी ओर, नियोजन पिछले अनुभवों और नियंत्रण की रिपोर्ट पर आधारित होता है। इस प्रकार दोनों के बीच घनिष्ठ और पारस्परिक संबंध मौजूद है।

24. “विज्ञापन के लिए भुगतान करना लाभदायक है” क्या आप इस कथन से सहमत हैं? अपने उत्तर के समर्थन में कारण दीजिए।
उत्तर – विज्ञापन के लिए भुगतान वांछनीय है क्योंकि विज्ञापन के अनेक लाभ हैं :
• जन-जन में पहुंच – मास मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंटरनेट, रेडियो, टेलीविजन और समाचार पत्र विज्ञापन को जनता तक पहुंचाने में सक्षम बनाते हैं।
• प्रभावशीलता – विज्ञापन उत्पाद को आकर्षक बनाते हैं और उच्च बिक्री के लिए मांग पैदा करते हैं।
• ग्राहक संतुष्टि – विज्ञापन आश्वासन की भावना पैदा करता है और ग्राहकों की संतुष्टि को बढ़ाता है।

अथवा

निम्नलिखित बिक्री संवर्धन तकनीकों की व्याख्या करें :
(A) उत्पाद संयोजन
(B) प्रयोग करने योग्य लाभ
(C) मात्रा उपहार
उत्तर –
(A) उत्पाद संयोजन – एक उत्पाद के क्रय पर दो उत्पादों के संयोजन की पेशकश। उदाहरण: किसान जैम के 100 ग्राम पाउच के साथ 500 ग्राम किसान टमाटर केचप।
(B) प्रयोग करने योग्य लाभ – यात्रा वाउचर या डिस्काउंट वाउचर आमतौर पर पेश किए जाते हैं। उदाहरण के लिए निश्चित मूल्य का सामान क्रय करने पर टूर पैकेज फ्री।
(C) मात्रा उपहार – ग्राहकों को उपहार के रूप में उत्पाद की कुछ अतिरिक्त मात्रा की पेशकश करना। उदाहरण के लिए: 20% अतिरिक्त या 2 खरीदें, निःशुल्क प्राप्त करें।

प्रश्न संख्या 25 से 30 तक प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में लिखें।
25. “अनौपचारिक सन्देशवाहन, औपचारिक सन्देशवाहन का अनेक प्रकार से पूरक है।” ग्रेपवाइन संचार के महत्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – अनौपचारिक सन्देशवाहन के महत्व :
(i) गति – ग्रेपवाइन संचार अत्यधिक तेज़ हैं और इसका उपयोग बहुत तेज़ी से संदेश भेजने के लिए किया जा सकता है।
(ii) मूल्यवान प्रतिक्रिया – अनौपचारिक सन्देशवाहन, प्रबंध को मूल्यवान प्रतिक्रिया प्रदान करती है, अगर इसका बुद्धिमानी से उपयोग किया जाता है। इसका उपयोग प्रबंधकों द्वारा सूचना प्रसारित करने के लिए किया जाता है ताकि उनके अधीनस्थों की प्रतिक्रियाओं को जाना जा सके।
(iii) भावनात्मक जुड़ाव – अनौपचारिक सन्देशवाहन काम में कर्मचारियों की रुचि बनाता है क्योंकि यह श्रमिकों के लिए भावनात्मक आउटलेट के रूप में कार्य करता है।
(iv) प्रेरक के रूप में – अनौपचारिक संचार, मनोबल बढ़ाने वाले के रूप में कार्य कर सकता है क्योंकि प्रबंध द्वारा अच्छे और सकारात्मक विचारों को प्रसारित करने के लिए इसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है।

26. वित्तीय प्रबंधन के अन्तर्गत लाभांश निर्णय को विस्तार से समझाइए।
उत्तर – लाभांश निर्णय से अर्थ है कि कंपनी के शुद्ध लाभ का कितना भाग अंशधारियों को वितरित किया जाना है और इसे व्यवसाय में कितना रखा जाना चाहिए।
लाभांश निर्णयों को प्रभावित करने वाले कारक :
(i) आय की राशि – लाभांश का भुगतान वर्तमान लाभ और संचय में से किया जाता है। इस प्रकार आय लाभांश निर्णय का एक प्रमुख निर्धारक है।
(ii) आय में स्थिरता – उच्च और स्थिर आय वाली कंपनी कम और अस्थिर आय वाली कंपनी की तुलना में अधिक लाभांश की घोषणा कर सकती है।
(iii) लाभांश की स्थिरता – आम तौर पर, कंपनियां प्रति अंश लाभांश को एक समान रखने का प्रयास करती हैं। प्रत्येक वर्ष एक स्थिर लाभांश दिया जाता है।
(iv) वृद्धि के अवसर – विकास के अच्छे अवसरों वाली कंपनियाँ अपनी आय में से अधिक धन अपने पास रखती हैं ताकि विकास कार्यों के लिए आवश्यक निवेश का प्रबंध किया जा सके। इसलिए लाभांश कम घोषित करती हैं।
(v) रोकड़ प्रवाह की स्थिति – लाभांश में रोकड़ का आउटफ्लो शामिल होता है। लाभांश के भुगतान या घोषणा के लिए पर्याप्त रोकड़ की उपलब्धता आवश्यक है।
(vi) अंशधारकों की वरीयता – लाभांश घोषित करते समय प्रबंध को अंशधारकों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखना चाहिए।
(vii) कराधान नीति – यदि लाभांश पर कर अधिक है, तो कम भुगतान करना बेहतर है। लेकिन अगर कर की दरें कम हैं, तो उच्च लाभांश घोषित किया जा सकता है।
(viii) स्टॉक मार्केट रिएक्शन – आम तौर पर, लाभांश में वृद्धि का शेयर बाजार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इसके विपरीत। अतः लाभांश का निर्णय करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
(ix) कानूनी बाधाएं – कंपनी अधिनियम के कुछ प्रावधान लाभांश के रूप में भुगतान पर प्रतिबंध लगाते हैं। लाभांश की घोषणा करते समय ऐसे प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।

27. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत दिए गए उपभोक्ता अधिकारों की सूची बनाएं और विस्तृत वर्णन करें ?
उत्तर – उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत, उपभोक्ता के अधिकार निम्नलिखित हैं :
(i) सुरक्षा का अधिकार
(ii) चुनने का अधिकार
(iii) सूचित किए जाने का अधिकार
(iv) उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार
(v) सुने जाने का अधिकार
(vi) मुआवजे की मांग का अधिकार

28. समता पर व्यापार को एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
उत्तर – समता पर व्यापार का अर्थ है समता अंशों पर प्रतिफल बढ़ाने के लिए डिबेंचर और ऋण जैसे वित्त के निश्चित लागत स्रोतों का उपयोग करना। इसका उपयोग तब किया जाना चाहिए जब निवेश पर प्रतिफल की दर डिबेंचर/ऋण पर देय ब्याज की दर से अधिक हो।
उदाहरण :

Situation I Situation II
Earning Before Interest and Tax (EBIT) 1,00,000 1,00,000
Interest 30,000
Earning Before Tax (EBT) 1,00,000 70,000
Tax 30,000 21,000
Earning After Tax (EAT) 70,000 79,000
No. of equity shares 50,000 20,000
Earning Per Share (EPS) = EAT ÷ No. of equity shares 70,000 ÷ 50,000 = 1.4 79,000 ÷ 20,000 = 3.95

 

29. मास्लो के आवश्यकता प्राथमिकता क्रम के सिद्धांत की व्याख्या करें।
उत्तर –

मास्लो द्वारा प्रतिपादित आवश्यकता प्राथमिकता क्रम में पाँच चरण हैं :
(i) शारीरिक आवश्यकताएँ – हवा, पानी, भोजन, कपड़े, आश्रय आदि।
(ii) सुरक्षा की आवश्यकताएँ – भय से मुक्ति, प्राकृतिक तत्वों से सुरक्षा, कानून और व्यवस्था, सुरक्षा और स्थिरता।
(iii) संबंध की आवश्यकताएँ – प्यार, दोस्ती, स्नेह, विश्वास और स्वीकृति, काम पर परिवार या दोस्तों का हिस्सा होना।
(iv) सम्मान की आवश्यकताएँ – आत्म-सम्मान, स्वतंत्रता, महारत, प्रभुत्व, उपलब्धि, प्रतिष्ठा, स्थिति।
(v) आत्म-वास्तविकता की आवश्यकता – आत्म-पूर्ति, व्यक्तिगत विकास की तलाश और व्यक्तिगत क्षमता का एहसास।

अथवा

कर्मचारियों की अभिप्रेरणा के लिए उपयोग किए जाने वाले किन्हीं चार गैर-वित्तीय प्रोत्साहनों की सूची बनाएं और वर्णन करें।
उत्तर – गैर वित्तीय प्रोत्साहन :
(i) प्रशंसा – एक कर्मचारी के काम के लिए उचित सम्मान देना उन्हें और अधिक मेहनती और अपने काम के प्रति समर्पित होने के लिए प्रोत्साहित करता है। उदाहरण के लिए कर्मचारी पहचान कार्यक्रम जहां समय-समय पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले की घोषणा की जाती है।
(ii) पदोन्नति – एक कर्मचारी को प्रेरित रखने के लिए, संगठन में उनकी स्थिति में सुधार करने के लिए कंपनियां उन्हें बढ़ावा दे सकती है।
(iii) कार्य सम्पन्नता – संगठन कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए उच्च ज्ञान और कौशल स्तर, अधिक जिम्मेदारी और स्वायत्तता को शामिल करने के लिए नौकरियों को डिजाइन कर सकते हैं।
(iv) नौकरी की सुरक्षा – संगठनों को ऐसी नौकरियां प्रदान करनी चाहिए जो उनके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अपेक्षाकृत स्थायी हो। यह आर्थिक सुरक्षा लाता है और कर्मचारियों को प्रेरित करता है।

30. भर्ती के किन्हीं दो बाह्य स्रोतों के नाम लिखिए और व्याख्या कीजिए।
उत्तर – भर्ती के बाहरी स्रोत :
(i) सीधी भर्ती – कई कंपनियां आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए फैक्ट्री गेट पर भर्ती की प्रथा का पालन करती हैं। ऐसे श्रमिकों को बदली श्रमिक के रूप में जाना जाता है। अकुशल श्रमिकों की भर्ती के लिए यह विधि बहुत उपयोगी है। इसमें रिक्तियों के विज्ञापन की लागत नहीं आती है।
(ii) आकस्मिक कॉल करने वाले – प्रतिष्ठित संगठनों में कई योग्य लोग अपनी पहल पर रोजगार के लिए आवेदन करते हैं। ऐसे आवेदकों को आकस्मिक कॉलर्स के रूप में जाना जाता है। वे जनशक्ति के एक अच्छे स्रोत के रूप में काम करते हैं। ऐसे आवेदनों की एक उचित फाइल रखी जा सकती है और जब भी आवश्यकता हो उम्मीदवारों को बुलाया जा सकता है।
(iii) विज्ञापन – विज्ञापन में नौकरी के विवरण और नौकरी की विशिष्टताओं के बारे में जानकारी दी जा सकती है ताकि केवल वही उम्मीदवार आवेदन कर सकें जो खुद को उपयुक्त समझते हैं।

अथवा

प्रशिक्षण की निम्नलिखित विधियों का वर्णन करें :
(A) पद बदली
(B) प्रकोष्ठशाला प्रशिक्षण
उत्तर –
(A) पद बदली – एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षु को व्यवस्थित रूप से एक शाखा से दूसरी शाखा में अथवा एक पद से दूसरे पद पर स्थानांतरित किया जाता है, ताकि विविध क्षेत्रों में उसके ज्ञान और दृष्टिकोण को व्यापक बनाया जा सके। एक प्रशिक्षित कर्मचारी अपने काम में अधिक कुशल होता है। उसके पास अपनी नौकरी के लिए बेहतर ज्ञान, कौशल विकास होता है। इससे उत्पादन में वृद्धि होती है जो उद्यम के लिए लाभदायक है।
(B) प्रकोष्ठशाला प्रशिक्षण – कर्मचारी कार्य स्थल पर उपयोग किए जाने वाले उपकरणों पर अपना काम सीखते हैं, लेकिन प्रशिक्षण वास्तविक कार्य तल से दूर आयोजित किया जाता है। वास्तविक कार्य वातावरण एक क्लास रूम में बनाया जाता हैं और कर्मचारी वास्तविक कच्चा माल, मशीनों और उपकरणों का उपयोग करते हैं। प्रशिक्षित कर्मचारी मशीनरी और उपकरणों को संभालने में कुशल होते हैं। इस प्रकार, दुर्घटनाओं की प्रायिकता बहुत कम हो जाती है।

प्रश्न संख्या 31 से 34 तक प्रत्येक प्रश्न 6 अंक का है। कुछ प्रश्नों में आंतरिक विकल्प भी दिया गया हैं। इन प्रश्नों के उत्तर लगभग 200 शब्दों में लिखें।
31. औपचारिक और अनौपचारिक संगठन को परिभाषित करें और अंतर लिखें।
उत्तर – औपचारिक और अनौपचारिक संगठन में अंतर :

औपचारिक संगठन अनौपचारिक संगठन
‘औपचारिक संगठन’ प्रबंध द्वारा परिभाषित अधिकारियों के बीच संबंध है। कर्मचारियों के बीच व्यक्तिगत और अनौपचारिक संबंधों पर आधारित संबंध है।
प्रबंध के नियमों और नीतियों से उत्पत्ति कर्मचारियों के बीच सामाजिक संपर्क से उत्पत्ति
संचार स्केलर श्रृंखला के माध्यम से प्रवाहित होता है। संचार के किसी नियोजित मार्ग का अनुसरण नहीं किया जाता है।
औपचारिक संगठन कठोर होते हैं। अनौपचारिक संगठन लचीले होते हैं।
अधिकार प्रबंधकीय पदों द्वारा परिभाषित अधिकार कर्मचारियों के व्यक्तिगत गुणों द्वारा परिभाषित
सामाजिक जरूरतों का पालन नहीं सामाजिक जरूरतों को पूरा करते हैं

 

32. विपणन मिश्रण क्या है? विपणन मिश्रण के विभिन्न तत्वों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर – विपणन मिश्रण में विभिन्न चर होते हैं, जिन्हें चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिन्हें लोकप्रिय रूप से विपणन के चार P’s के रूप में जाना जाता है। ये हैं : उत्पाद, मूल्य, स्थान, और संवर्धन

(i) उत्पाद मिश्रण (Product Mix) – उत्पाद उपयोगिताओं का एक समूह है जो किसी व्यक्ति या समूह की किसी विशेष आवश्यकता को पूरा करता है। इसमें वस्तु तथा सेवाएं दोनों शामिल हैं। उत्पाद मिश्रण में नए उत्पाद के डिजाइन और विकास, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और लेबलिंग के संबंध में निर्णय शामिल हैं।
(ii) कीमत मिश्रण (Price Mix) – मूल्य विपणन मिश्रण का एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक है। यह लाभ और बिक्री की मात्रा निर्धारित करता है। उत्पाद की लागत का निर्धारण करते समय ध्यान रखने वाली बातें हैं, प्रतियोगी की कीमत, सूची मूल्य, ग्राहक का स्थान, छूट, बिक्री की शर्तें, आदि।
(iii) स्थान मिश्रण (Place Mix) – मार्केटिंग मिक्स रणनीति में प्लेसमेंट महत्त्वपूर्ण है। एक कंपनी को अपने उत्पाद को ऐसे स्थान पर स्थापित और वितरित करना चाहिए जो संभावित खरीदारों/ग्राहकों के लिए आसानी से सुलभ हो। इसमें वितरण चैनल और भौतिक वितरण दोनों शामिल है।
(iv) संवर्धन मिश्रण (Promotion Mix) – यह एक विपणन संचार प्रक्रिया है उत्पाद और उसकी विशेषताओं को जनता के सामने प्रचारित करने में मदद करती है। संवर्धन तकनीक, ग्राहकों का ध्यान खींचती है और उन्हें उत्पाद खरीदने के लिए प्रभावित करती है। इसमें विज्ञापन, व्यक्तिगत बिक्री, बिक्री संवर्धन और प्रचार शामिल हैं।

33. नीति, उद्देश्य और नियम से कैसे भिन्न है? प्रत्येक का उदाहरण दीजिए और प्रत्येक स्थिति में कोई दो अंतर बताइए।
उत्तर –
नीति और नियम के बीच अंतर –

आधार नीति नियम
अर्थ एक व्यापक योजना जिसमें उन सीमाओं का निर्धारण किया जाता है जिनके भीतर निर्णय लिए जा सकते हैं। दी गई स्थिति में क्या करना है या क्या नहीं करना है, यह बताने वाली एक विशिष्ट योजना।
उद्देश्य निर्णय लेने में मार्गदर्शन करना। व्यवहार का मार्गदर्शन करना और अनुशासन सुनिश्चित करना।
प्रकृति एक सामान्य कथन एक विशिष्ट कथन
लचीलापन यह लोचशील है क्योंकि इसमें विवेक के आधार पर निर्णय लिए जा सकते हैं। यह कठोर है क्योंकि इसमें विवेक के आधार पर निर्णय नहीं लिए जा सकते हैं।
दंड उल्लंघन के लिए दंड निर्दिष्ट नहीं है। आम तौर पर निर्दिष्ट उल्लंघन के लिए जुर्माना।
स्रोत उद्देश्यों के आधार पर। नीतियों और प्रक्रियाओं के आधार पर।

 

नीति और उद्देश्य के बीच अंतर –

आधार नीति उद्देश्य
अर्थ नीतियां वे सामान्य विवरण हैं, जो प्रबन्धकों एवं कर्मचारियों का मार्गदर्शन करती हैं। उद्देश्य अंतिम परिणाम या मापने योग्य परिणाम होते हैं, जो एक व्यवसाय एक निश्चित समय सीमा पर प्राप्त करना चाहता है।
उद्देश्य यह निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करती है। नीतियों, कार्यविधियों आदि के निर्माण कार्यों के लिए पथ प्रदर्शक हैं।
क्षेत्र उद्देश्यों की तुलना में संकीर्ण क्षेत्र है। क्षेत्र व्यापक है।

 

अथवा

“नियोजन व्यवसाय की सफलता की गारंटी नहीं है” टिप्पणी करें।
उत्तर – नियोजन सफलता की गारंटी नहीं देता, यह कथन सत्य है क्योंकि नियोजन केवल एक साधन है।
नियोजन की सीमाओं में शामिल हैं :
(i) नियोजन अलोचकता उत्पन्न करता है –
किसी संगठन में बनाई गई एक विशिष्ट योजना स्पष्ट रूप से प्राप्त किए जाने वाले उद्देश्य और कार्य करने के तरीकों को इंगित करती है। चूंकि, एक प्रबंधक इन योजनाओं को बदल नहीं सकता है, इससे कठोरता आती है।
(ii) नियोजन गतिशील वातावरण में काम नहीं करता –
सामाजिक, आर्थिक, कानूनी और अन्य कारक बदलते रहते हैं। संगठन को ऐसे बदलावों के लिए खुद को ढालना होता है। लेकिन, नियोजन भविष्य की प्रवृत्तियों का ठीक-ठीक आकलन नहीं कर सकता है और इस प्रकार एक गतिशील वातावरण में विफल रहता है।
(iii) नियोजन रचनात्मकता को कम करता है –
यह एक गतिविधि है, जो शीर्ष प्रबंधन द्वारा की जाती है और बाकी सदस्य इन योजनाओं को लागू करते हैं। उन्हें न तो योजनाओं से विचलित होने की अनुमति है और न ही उन्हें अपने दम पर कार्य करने की अनुमति है। इसके कारण, प्रबंधकों या अन्य सदस्यों में निहित अधिकांश पहल या रचनात्मकता खो जाती है या कम हो जाती है, और संगठन में कुछ भी नया या अभिनव नहीं होता है।
(iv) नियोजन में भारी लागत शामिल है –
इसमें आमतौर पर प्रबंधकों का बहुत समय, प्रयास और लागत शामिल होती है। डेटा का संग्रह, बोर्डरूम बैठकें, जांच और विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श में संगठन का बहुत अधिक व्यय शामिल होता है। कभी-कभी, खर्च की गई लागत योजनाओं से प्राप्त लाभ को न्यायोचित नहीं ठहरा सकती है।
(v) नियोजन में समय अधिक लगता है –
कई बार योजनाएं बनने में इतना समय लग जाता है कि उन्हें क्रियान्वित करने के लिए समय ही नहीं बचता। इससे प्लानिंग फेल हो जाती है।
(vi) नियोजन सफलता की गारंटी नहीं है –
नियोजन की सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। सही क्रियान्वयन के अभाव में नियोजन विफल हो सकता है। भले ही किसी योजना ने पहले काम किया हो, बाहरी वातावरण में बदलाव के कारण यह फिर से काम न करे।

34. टेलर द्वारा दी गई वैज्ञानिक प्रबंध की निम्नलिखित तकनीकों में से किन्हीं तीन तकनीकों की संक्षेप में व्याख्या करें :
(A) कार्यविधि अध्ययन
(B) क्रियात्मक फॉरेमेन्शिप
(C) मानकीकरण
(D) विभेदात्मक मजदूरी प्रणाली
उत्तर –
(A) कार्यविधि (विधि) अध्ययन – यह किसी विशेष गतिविधि को करने के लिए सबसे उपयुक्त तरीके की पहचान करता है। इस अध्ययन को संचालित करने के लिए प्रक्रिया चार्ट और संचालन अनुसंधान तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उत्पादन की लागत को कम करना और उपभोक्ता संतुष्टि की गुणवत्ता और स्तर को अधिकतम करना है।
(B) क्रियात्मक फॉरेमेन्शिप – एफडब्ल्यू टेलर ने क्रियात्मक फॉरेमेन्शिप को प्रतिपादित किया है, जिसमे योजना बनाने और लागू करने के कार्य को अलग अलग रखा गया है। संगठन का यह पूरी तरह से विशेषज्ञता के सिद्धांत पर आधारित है और श्रमिकों के लिए 8 विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का पूरा उपयोग करता है। एक क्रियात्मक संगठन में, कार्य को कई छोटे भागों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक भाग एक विशेषज्ञ को सौंपा जाता है।
(C) मानकीकरण (प्रमापीकरण) – प्रमापीकरण का अर्थ है उचित विचार-विमर्श के बाद विभिन्न कारकों के लिए मानक स्थापित करना। उदाहरण के लिए, एक श्रमिक द्वारा एक दिन में किए जाने वाले कार्य की मात्रा को मानकीकृत किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, कार्यकर्ता से प्रतिदिन मानक मात्रा में कार्य करने की अपेक्षा की जाती है। इसी प्रकार कच्चे माल, मशीनें और उपकरण, तकनीक, काम की शर्तें आदि के लिए भी मानक निर्धारित किए जा सकते हैं।
(D) विभेदात्मक मजदूरी पद्धति – टेलर ने कर्मचारियों को प्रेरित करने के लिए विभेदक मजदूरी प्रणाली अपनाने की सलाह दी है। इस प्रणाली के अनुसार मजदूरी का भुगतान किए गए कार्य के आधार पर किया जाता है न कि कार्य करने में लगे समय के आधार पर। इस प्रणाली में दो अलग-अलग मजदूरी दरों का उपयोग किया जाता है: एक उच्च मजदूरी दर और दूसरी कम मजदूरी दर। जो श्रमिक एक निश्चित अवधि के भीतर मानक संख्या में इकाइयों का उत्पादन करने में सक्षम हैं, उन्हें उच्च मजदूरी दर के अनुसार भुगतान किया जाता है, और जो श्रमिक एक ही समय के भीतर मानक संख्या में इकाइयों का उत्पादन करने में सक्षम नहीं होते हैं, उन्हें कम मजदूरी दर के अनुसार भुगतान किया जाता है।

अथवा

हेनरी फेयोल द्वारा दिए गए प्रबंध के निम्नलिखित सिद्धांतों में से किन्हीं तीन सिद्धांतों की संक्षेप में व्याख्या कीजिए :
(A) आदेश की एकता
(B) समता
(C) पारिश्रमिक
(D) पहल
उत्तर –
(A) आदेश की एकता – आदेश की एकता का सिद्धांत कहता है कि कर्मचारियों को केवल एक बॉस से आदेश और निर्देश प्राप्त होने चाहिए। यदि एक ही समय में दो या दो से अधिक वरिष्ठ अधिकारी किसी कर्मचारी को आदेश दें तो वह भ्रमित हो जाएगा कि वह किसकी आज्ञा का पालन करें। यदि संगठन में आदेश की एकता बनी रहती है तो यह श्रमिकों के बीच भ्रम, वरिष्ठों के बीच संघर्ष से बचने और श्रमिकों और प्रबंधकों के बीच बेहतर संबंध बनाने में मदद करेगा।
(B) समता – सभी कर्मचारियों के साथ समान और सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाना चाहिए। यह प्रबंधक की जिम्मेदारी है कि किसी भी कर्मचारी को भेदभाव का सामना न करना पड़े। प्रबंधकों को कर्मचारियों के साथ उचित और निष्पक्ष व्यवहार करना चाहिए। उदाहरण के लिए, एक कर्मचारी को वेतन सहित छुट्टी की अनुमति देना और दूसरे को मना करना असंतोष पैदा करेगा।
(C) पारिश्रमिक – इस सिद्धांत के अनुसार प्रेरणा और उत्पादकता एक दूसरे पर निर्भर हैं। कर्मचारियों को प्रेरित और उत्पादक बनाए रखने के लिए पारिश्रमिक पर्याप्त होना चाहिए। यह एक कर्मचारियों के कार्य के अनुसार उचित और पर्याप्त होना चाहिए।
(D) पहल – प्रबंध को कर्मचारियों को एक संगठन में पहल करने के लिए समर्थन और प्रोत्साहित करना चाहिए। इससे उन्हें अपनी रुचि बढ़ाने और विकास में मदद मिलेगी। कर्मचारियों को नए विचारों को व्यक्त करने की अनुमति दी जानी चाहिए। यह रुचि और भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और कंपनी के लक्ष्य प्राप्ति को सम्भव बनाता है।

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