HBSE Class 12th Economics Sample Paper 2024 Answer

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HBSE Class 12th Economics Sample / Model Paper 2024 Answer

कक्षा – 12वी                       विषय – Economics
समय : 3 घंटे                         पूर्णांक : 80

सामान्य निर्देश –
(i) इस प्रश्न-पत्र में 34 प्रश्न है। सभी प्रश्न अनिवार्य है।
(ii) यह प्रश्न पत्र दो खण्डों में विभाजित है। खण्ड-क (व्यष्टि अर्थशास्त्र) तथा खण्ड-ख (समष्टि अर्थशास्त्र)
(iii) इस प्रश्न-पत्र में एक-एक अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न है। इनकी प्रश्न संख्या Q1 से Q10 तथा Q18 से Q27 है।
(iv) इस प्रश्न पत्र में तीन-तीन अंकों के 4 लघु उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं जिनके उत्तर 60 से 80 शब्दों में लिखे जाने चाहिए। इनकी प्रश्न संख्या Q11, Q12, Q28 तथा Q29 है।
(v) इस प्रश्न-पत्र के चार-चार अंकों के 6 लघु उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं जिनके उत्तर 80 से 100 शब्दों में लिखे जाने चाहिए। इनकी प्रश्न संख्या Q13, Q14, Q15, Q30, Q31 तथा Q32 है।
(vi) इस प्रश्न-पत्र में छः-छः अंकों के 4 दीर्घ उत्तरीय प्रकार के प्रश्न हैं जिनके उत्तर 100 से 150 शब्दों में लिखे जाने चाहिए। इनकी प्रश्न संख्या Q16, Q17, Q33 तथा Q34 है।

खण्ड क – व्यष्टि अर्थशास्त्र (Micro Economics)
1. जब सीमांत उत्पादन –ve होता है तो कुल उत्पादन
(a) शून्य
(b) बढ़ता
(c) घटता
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (c) घटता

2. रेक्टैंगुलर हाइपरबोला (Retangular Hyperbola) लागत वक्र
(a) कुल स्थिर लागत
(b) कुल परिवर्तनशील लागत
(c) औसत स्थिर लागत
(d) औसत परिवर्तशील लागत
उत्तर – (c) औसत स्थिर लागत

3. परिवर्ती अनुपात का नियम से सम्बन्धित है।
(a) लागत
(b) उत्पादन
(c) आगम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर – (b) उत्पादन

4. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में फर्म का मांग वक्र होता है।
(a) धनात्मक
(b) ऋणात्मक
(c) OX के समांतर
(d) OY के समांतर
उत्तर – (c) OX के समांतर

5. व्यष्टि अर्थशास्त्र में निम्न का अध्ययन किया जाता है।
(a) राष्ट्रीय आय
(b) व्यापार चक्र
(c) मांग का सिद्धांत
(d) मुद्रास्फीति
उत्तर – (c) मांग का सिद्धांत

6. औसत आगम वक्र को ………… कहते है। (मांग वक्र / पूर्ति वक्र)
उत्तर – मांग वक्र

7. पेप्सी और कोक ………. वस्तुएं हैं। (पूरक / प्रतिस्थापन)
उत्तर – प्रतिस्थापन

8. उत्पादन सम्भावना वक्र …………. होते हैं। (उन्नोत्तर / नतोदर)
उत्तर – नतोदर

निम्नलिखित कथनों को पढ़ें– अभिकथन (A) तथा तर्क (R)। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें।
(a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) अभिकथन (A) सत्य है परन्तु तर्क (R) असत्य है।
(d) अभिकथन (A) असत्य है परन्तु तर्क (R) सत्य हैं।

9. अभिकथन (A) : औसत लागत वक्र U आकार का होता है।
तर्क (R) : परिवर्ती अनुपात का नियम अल्पकाल में लागू होता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

10. अभिकथन (A) : गिफ्फन वस्तुएं मांग के नियम का अपवाद होती है।
तर्क (R) : पूर्ति वक्र का ढलान धनात्मक होता है।
उत्तर – (b) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।

11. आर्थिक समस्या के कौन-2 से कारण है?
उत्तर – आर्थिक समस्या के कारण :
(i) असीमित आवश्यकताएं – मनुष्य की आवश्यकता असीमित है और प्रतिदिन ये आवश्यकताएं बढ़ती जा रही है।
(ii) सीमित साधन – असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने वाले साधन सीमित होते है अर्थात् दुर्लभ।
(iii) वैकल्पिक उपयोग – साधन सीमित होने के साथ-साथ इनका वैकल्पिक उपयोग होता है। अतः मनुष्य को चुनाव करना होता है। चुनाव की समस्या ही आर्थिक समस्या कहलाती हैं।

अथवा

अधिमान वक्रो की सहायता से उपरोक्ता संतुलन की व्याख्या करें।
उत्तर – एक उपभोक्ता उस समय संतुलन में होता है जब वह अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है। संतुलन की शर्ते :
(i) सीमांत प्रतिस्थापन की दर (MRSxy) = Px/Py (बजट रेखा का ढलान)
(ii) इस अवस्था मे तटस्थता वक्र मूल बिन्दु की ओर उन्नोत्तर होते हैं।

12. कुल आगम, सीमांत आगम और औसत आगम से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : कुल आगम – कुल आगम से अभिप्राय हैं कि एक उत्पादक को अपना कुल उत्पादन बेचकर प्राप्त होने वाली मौद्रिक प्राप्तियां।
TR = AR × Q
• सीमांत आगम – सीमांत आगम से अभिप्राय किसी वस्तु की एक ईकाई अधिक बेचने से कुल आगम में होने वाला परिवर्तन।
MR = TRn – TRn-1 = ∆TR/∆Q
• औसत आगम – औसत आगम से अभिप्राय उत्पादक को प्रति ईकाई उत्पादन बेचकर प्राप्त होने वाली मौदिक प्राप्तियां।
AR = TR/Q

13. कारक के समान प्रतिफल की व्याख्या रेखाचित्र एवं तालिका सहित करों।
उत्तर : कारक के समान प्रतिफल – अल्पकाल में जब स्थिर कारकों की निश्चित इकाईयों के साथ परिवर्तनशील कारको में वृद्धि की जाए। इस अवस्था में कुल उत्पादन (TP) समान दर पर बढ़ता है एवं सीमांत उत्पादन (MP) एवं सीमातं लागत (MC) स्थिर रहती है।

श्रम की ईकाईयां 1 2 3 4 5 6 7
भूमि की ईकाईयां 1 1 1 1 1 1 1
कुल उत्पादन 10 20 30 40 50 60 70
सीमांत उत्पादन 10 10 10 10 10 10 10

अथवा

कारक के घटते प्रतिफल की व्याख्या रेखाचित्र एवं तालिका सहित करों।
उत्तर : कारक के घटते प्रतिफल – अल्पकाल में जब स्थिर कारकों की निश्चित इकाईयों के साथ परिवर्तनशील कारको में वृद्धि की जाए। इस अवस्था में कुल उत्पादन (TP) घटते दर पर बढता है एवं सीमांत उत्पादन (MP) घटता एवं सीमातं लागत (MC) बढ़ती है।

श्रम की ईकाईयां 1 2 3 4 5 6 7
भूमि की ईकाईयां 1 1 1 1 1 1 1
कुल उत्पादन 5 9 12 14 15 15 14
सीमांत उत्पादन 5 4 3 2 1 0 -1

14. औसत परिवर्तनशील (AVC), औसत स्थिर लागत (AFC), कुल परिवर्तनशील लागत (TVC) और सीमांत लागत (MC) ज्ञात करें।

उत्पाद 0 1 2 3 4 5 6
कुल लागत 40 80 110 126 128 135 180

उत्तर – 

उत्पाद 0 1 2 3 4 5 6
कुल लागत (TC) 40 80 110 126 128 135 180
TFC 40 40 40 40 40 40 40
TVC 0 40 70 86 88 95 140
AFC 40 20 13.33 10 8 6.67
AVC 40 35 28.7 22 19 23.3
MC 40 30 16 2 7 45

 

15. संतुलित कीमत की व्याख्या अनुसूची और रेखाचित्र की सहायता से करें।
उत्तर – संतुलित कीमत वह कीमत है जिस पर किसी वस्तु की मांग और पूर्ति बराबर होती है अर्थात क्रेताओं का क्रय और विक्रेताओं का विक्रय एक दूसरे के बराबर होता है।

कीमत 1 2 3 4 5
मांग 50 40 30 20 10
पूर्ति 10 20 30 40 50

16. मांग की कीमत लोच मापने की व्यय विधि की व्याख्या करें।
उत्तर – कुल व्यय विधि यह बताती है कि किसी वस्तु की कीमत में परिवर्तन होने पर कुल व्यय में कितना परिवर्तन और किस दिशा में हुआ है।
(i) वस्तु की कीमत बढ़ने या घटने पर उस वस्तु पर किया गया कुल व्यय स्थिर रहे तो मांग की कीमत लोच ईकाई होगी।
(ii) वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल व्यय घट जाए और कीमत घटने पर कुल व्यय बढ़ जाए तो मांग की कीमत लोच इकाई से अधिक होगी।
(iii) वस्तु की कीमत बढ़ने पर कुल व्यय बढ़ जाए और कीमत घटने पर कुल व्यय घट जाए तो मांग की कीमत लोच इकाई से कम होगी।

कीमत मात्रा कुल व्यय मांग की लाेच
1

2

10

5

10

10

Ed = 1
1

2

10

4

10

8

Ed > 1
1

2

10

6

10

12

Ed < 1

अथवा

मांग का नियम किसे कहते हैं? मांग वक्र बाये से दाये की ओर ऊपर की तरफ क्यों होता है ?
उत्तर – माँग का नियम यह बताता है कि अन्य बातें समान रहने पर, किसी वस्तु की अपनी कीमत बढ़ने पर उसकी मांग कम हो जाती है तथा अपनी कीमत कम होने पर उसकी मांग बढ़ जाती है। मांग वक्र का ढलान धनात्मक निम्न अवस्थाओं में हो सकता है :
(i) प्रतिस्थासूचक वस्तुएं – ऐसी वस्तुएं जो समाज में प्रतिष्ठा सूचक होती है उन वस्तुओं की मांग का ढलान घनात्मक होता है।
(ii) उपभोक्ता की अज्ञानता – जब कोई उपभोक्ता अज्ञानता के कारण अधिक मूल्य वाली वस्तु को बढ़िया मानता है और कम मूल्य वाली वस्तु को निम्नकोटि मानता है। उस अवस्था में भी मांग वक्र का ढलान +ve होता है।
(iii) गिफ्फन वस्तुएं – इन वस्तुओं पर मांग का नियम लागू नहीं होता, क्योंकि इनका आय प्रभाव ऋणात्मक और कीमत प्रभाव धनात्मक होता है।

17. पूर्ण प्रतियोगिता बाजार किसे कहते है? इसकी विशेषताएं बताइए।
उत्तर – पूर्ण प्रतियोगिता बाजार उस बाजार को कहते है जिसमें समरूप वस्तु के असंख्य क्रेता और असंख्य विक्रेता होते हैं जो समरूप वस्तु को समान कीमत पर बेचते और खरीदते हैं।
विशेषताएं –
(i) क्रेताओं और विक्रेता की अधिक संख्या
(ii) समरूप वस्तुएं
(iii) पूर्ण ज्ञान
(iv) पूर्ण गतिशीलता
(v) फर्मों का स्वतंत्र प्रवेश व छोड़ना
(vi) यातायात लागत का अभाव
(vii) AR और MR बराबर
(viii) वस्तु की कीमत उद्योग द्वारा निर्धारित

अथवा

सीमांत आगम और सीमांत लागत की सहायता से उत्पादक संतुलन की शर्तों की व्याख्या करें।
उत्तर – फर्म के संतुलन को ज्ञात करने की महत्वपूर्ण विधि सीमांत विधि कहलाती है। एक फर्म संतुलन की अवस्था में उस समय होगी जब निम्नलिखित शर्ते पूर्ण होगी :
(i) MC = MR (आवश्यक शर्त)
(ii) MC वक्र MR वक्र को नीचे से काटे
(a) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) से अधिक है तो फर्म अपने उत्पादन मे वृद्धि करेगी।
(b) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) से कम है तो फर्म अपने उत्पादन में कमी करेगी।
(c) यदि सीमांत आगम (MR) सीमात लागत (MC) के बराबर है और सीमांत लागत (MC) बढ़ रही हो तब उत्पादन संतुलन की स्थिति में होगा।

खण्ड ख – समष्टि अर्थशास्त्र (Macro Economics)
18. आय के चक्रीय प्रवाह के रिसाव में निम्न को शामिल किया जाता है ?
(a) फर्म द्वारा उधार
(b) सार्वजनिक व्यय
(c) निवेश
(d) बचत
उत्तर – (d) बचत

19. निवल निवेश बराबर होता है
(a) सकल निवेश – घिसावट
(b) सकल निवेश + घिसावट
(c) सकल निवेश ÷ घिसावट
(d) सकल निवेश × घिसावट
उत्तर – (a) सकल निवेश – घिसावट

20. राष्ट्रीय आय में निम्न को शामिल नहीं किया जाता है ?
(a) घरेलू सेवाएं
(b) हस्तांतरण आय
(c) मध्यवर्ती वस्तुएं
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर – (d) उपरोक्त सभी

21. भारत का केन्द्रीय बैंक कौन सा है ?
(a) RBI
(b) SBI
(c) PNB
(d) HDFC
उत्तर – (a) RBI

22. भारत में वित्त वर्ष किस तिथि को प्रारम्भ होता है ?
(a) 1 जुलाई
(b) 1 जनवरी
(c) 31 मार्च
(d) 1 अप्रैल
उत्तर – (d) 1 अप्रैल

23. लाभांश ………… का एक भाग होता है। (ब्याज / लाभ)
उत्तर – लाभ

24. सामान्य कीमत स्तर का अध्ययन …………. अर्थशास्त्र में होता है। (व्यष्टि / समष्टि)
उत्तर – समष्टि

25. प्राथमिक घाटा = ……….. – ब्याज का भुगतान। (राजस्व घाटा / राजकोषीय घाटा)
उत्तर – राजकोषीय घाटा

निम्नलिखित कथनों को पढ़ें– अभिकथन (A) तथा तर्क (R)। नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन करें।
(a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) अभिकथन (A) सत्य है परन्तु तर्क (R) असत्य है।
(d) अभिकथन (A) असत्य है परन्तु तर्क (R) सत्य हैं।

26. अभिकथन (A) : M3, M1 की तुलना में विस्तृत धारणा है।
तर्क (R) : केन्द्रीय बैंक मुद्रा की पूर्ति को नियंत्रित करता है।
उत्तर – (a) अभिकथन (A) तथा तर्क (R) दोनों सत्य हैं तथा तर्क (R) अभिकथन (A) का सही स्पष्टीकरण है।

27. अभिकथन (A) : बैंक दर मौद्रिक नीति का एक भाग है।
तर्क (R) : कर मौद्रिक नीति का एक भाग है।
उत्तर – (c) अभिकथन (A) सत्य है परन्तु तर्क (R) असत्य है।

28. सीमांत उपभोग प्रवृति और सीमांत बचत प्रवृति ज्ञात करें।

आय 0 100 200 300 400
उपभोग 60 110 150 180 200

उत्तर –

आय 0 100 200 300 400
उपभोग 60 110 150 180 200
आय में परिवर्तन 100 100 100 100
उपभोग में परिवर्तन 50 40 30 20
सीमांत उपभोग प्रवृति 0.5 0.4 0.3 0.2
सीमांत बचत प्रवृति 0.5 0.6 0.7 0.8

 

अथवा

अर्थव्यवस्था का बचत फलन S = 200 + 0.25Y है। ज्ञात करें
(i) स्वतंत्र उपयोग
(ii) उपयोग फलन
(iii) निवेश गुणक (K)
उत्तर : (i) जब आय शून्य है तो S = -200 + 0.25(0) = -200
अतः स्वतंत्र उपयोग = 200
(ii) उपयोग फलन C = Y – S
C =Y – (-200 + 0.25Y)
C = Y + 200 – 0.25Y
C = 200 + 0.75Y
(iii) निवेश गुणक (K) = 1/MPS = 1/0.25 = 4

29. व्यष्टि और समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर बताइए।
उत्तर –

व्यष्टि अर्थशास्त्र समष्टि अर्थशास्त्र
1. व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक समस्या का अध्ययन किया जाता है। 1. सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था के स्तर पर आर्थिक समस्या का अध्ययन किया जाता है।
2. व्यष्टि अर्थव्यवस्था की केन्द्रीय समस्या कीमत निर्धारित है।  2. समष्टि अर्थशास्त्र की केन्द्रीय समस्या उत्पादन एवं रोजगार का निर्धारण है।
3. इसमें समष्टि चरों को स्थिर मानते हैं। 3. इसमें व्यष्टि चरों को स्थिर मानते है।

 

30. सरकारी बजट से आप क्या समझते हैं और इसके मुख्य उद्देश्य बताएं।
उत्तर – सरकारी बजट एक वित्तीय वर्ष की अवधि के दौरान सरकार की प्राप्तियों तथा सरकार के व्यय के अनुमानों का विवरण होता है, जो एक अप्रैल से 31 मार्च तक के अनुमानित आय और व्यय को प्रकट करता है।
इसके मुख्य उद्देश्य –
(i) आय और सम्पत्ति का पुनः वितरण – अर्थव्यवस्था में आय और सम्पत्ति के बंटवारे में सुधार लाने हेतु सरकार कराधान तथा आर्थिक सहायता के वित्तीय उपकरणों का प्रयोग करती है।
(ii) साधनों का पुनः बंटवारा – अपनी बजट सम्बन्धी नीति द्वारा सरकार साधनों का बंटवारा इस प्रकार करती है जिसमें अधिकतम लाभ तथा सामाजिक कल्याण के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके।
(iii) आर्थिक स्थिरता – बजट के द्वारा अर्थव्यवस्था में आने वाले व्यापार चक्रों को भी नियंत्रित किया जाता है जिससे मन्दी और तेजी की स्थिति को सुधारा जा सके।
(iv) सार्वजनिक उद्यमों का प्रबन्ध – सरकार सार्वजनिक उद्यमों का प्रबन्ध करती है जिसके द्वारा देश की विकास की गति को तीव्र किया जाता है।

31. निवेश गुणक से आप क्या समझते है? निवेश गुणक प्रक्रिया की व्याख्या कीजिए जब निवेश में प्रारम्भिक वृद्धि (∆I) 2000 करोड़ रूपये और सीमांत उपभोग प्रवृति (MPC) 0.5 हो।
उत्तर :  K = ∆Y/∆I = 1/(1-MPC) = 1/MPS

K = 1/(1-MPC) = 1/(1-0.5) = 1/0.5 = 2
K = ∆Y/∆I = 2
∆Y/2000 = 2
∆Y = 2 × 2000 = 4000

अथवा

अभावी मांग किसे कहते हैं? राजकोषीय उपायों के द्वारा किस प्रकार अभावी मांग को दूर किया जा सकता है ?
उत्तर – अभावी मांग वह स्थिति है जिसमे समग्र मांग (AD) अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार के लिए आवश्यक समग्र पूर्ति (AS) से कम होती है।
अभावी मांग को ठीक करने के लिए राजकोषीय नीति के उपाय :
(i) करो में कमी
(ii) सार्वजनिक व्यय में वृद्धि
(iii) घाटे की वित्त व्यवस्था में वृद्धि
(iv) सार्वजनिक ऋण में कमी

32. व्यापार शेष और भुगतान शेष में क्या अंतर पाया जाता है ?
उत्तर –

व्यापार शेष भुगतान शेष
1. इसमें केवल दृश्य मदों को शामिल किया जाता है। 1. इसमें दृश्य, अदृश्य और पूंजी अंतरण सभी को शामिल किया जाता है।
2. यह एक संकुचित धारणा है।  2. यह एक विस्तृत धारणा है।
3. आर्थिक दृष्टि से कम महत्वपूर्ण है। 3. आर्थिक दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण है।
4. व्यापार शेष संतुलित या असंतुलित हो सकता है। 4. भुगतान शेष सदैव संतुलित होता है।

 

33. मुद्रा और उसके कार्य की व्याख्या करें।
उत्तर – मुद्रा की परिभाषा ऐसी किसी वस्तु के रूप में दी जा सकती है जिसे साधारणतः विनियम का माध्यम स्वीकार किया जाता हो और उसके साथ ही जो मूल्य के मापक और मूल्य के संचय का भी कार्य करती हो।
(i) विनियम का माध्यम – मुद्रा के रूप में एक व्यक्ति अपनी वस्तुओं को बेचता है तथा दूसरी वस्तओं को खरीदता है। मुद्रा क्रय तथा विक्रय दोनों में ही एक माध्यम का कार्य करती है।
(ii) मूल्य का मापदण्ड – मुद्रा लेखें की इकाई के रूप में मूल्य का माप करती है अर्थात प्रत्येक वस्तु तथा सेवा का मूल्य मुद्रा के रूप में मापा जाता है।
(iii) स्थगित भुगतानों का माप – जिन लेन-देन का भुगतान तत्काल न करके भविष्य के लिए स्थगित किया जा सकता हैं उन्हें स्थगित भुगतान कहा जाता है। मुद्रा इस प्रकार के स्थगित भुगतानों के माप का कार्य करती है क्योंकि इसका मूल्य स्थिर रहता और सामान्य स्वीकृति का गुण पाया जाता है।
(iv) मूल्य का संचय – मूल्य का संचय का अर्थ मुद्रा का धन के रूप में संचय से है। वस्तु विनियम प्रणाली में यह कार्य कठिन था परन्तु मुद्रा के अविष्कार से धन का संचय बचत के रूप में करना आसान हो गया है।
(v) मूल्य का हस्तांतरण – मूल्य का हस्तांतरण से अभिप्राय पूंजी का एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति तथा एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजना। मुद्रा में तरलता एवं सामान्य स्वीकृति के कारण मूल्य का हस्तांतरण संभव हो पाया है।

अथवा

केन्द्रिय और व्यापारिक बैंक में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर –

केन्द्रिय बैंक व्यापारिक बैंक
1. केन्द्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा होता है। 1. व्यापारिक बैंकों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना है।
2. इनका जनता के साथ सीधा लेन-देन नहीं होता है। 2. इनका जनता के साथ सीधा लेन-दन होता है ।
3. यह एक सरकारी संस्था होती है। 3. ये सरकारी एवं गैर सरकारी संस्था हो सकते है।
4. केन्द्रीय बैंक को नोट जारी करने का पूर्ण एकाधिकार होता है। 4. व्यापारिक बैंक नोट जारी नहीं कर सकते।
5. यह देश की बैंकिंग प्रणाली को नियंत्रित करता है। 5. ये केन्द्रीय बैंक के नियंत्रण में कार्य करते हैं।
6. यह देश के विदेशी विनिमय का संरक्षक होता है। 6. यह बैंक विदेशी विनिमय सम्बन्धी कार्यों के लिए केन्द्रीय बैंक की स्वीकृति पर निर्भर करते हैं।

 

34. राष्ट्रीय आय को मापने की मूल्य वृद्धि विधि की व्याख्या करें।
उत्तर – राष्ट्रीय आय को मापने की उत्पाद विधि को मूल्य वृद्धि विधि कहा जाता है। यह विधि एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा के अर्न्तगत प्रत्येक उत्पादक उद्यमी की उत्पादन में योगदान की गणना करके राष्ट्रीय आय का अनुमान लगाती है। इस विधि के द्वारा देश की घरेलू सीमा में प्रत्येक उत्पादक द्वारा की गई मूल्य वृद्धि की गणना करके तथा उसमें विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय को जोड़कर राष्ट्रीय आय को मापती है।
मूल्य वृद्धि के कदम :
(i) उत्पादक उद्यमों की पहचान एवं वर्गीकरण –
(a) प्राथमिक क्षेत्र
(b) द्वितीयक क्षेत्र
(c) तृतीयक क्षेत्र
(ii) मूल्य वृद्धि की गणना –
मूल्य वृद्धि (GDPMP) = उत्पादन का मूल्य – मध्यवर्ती उपभोग
उत्पादन का मूल्य = बिक्री + स्टॉक में परिवर्तन
स्टॉक में परिवर्तन = अन्तिम स्टॉक – प्रारम्भिक स्टॉक
मध्यवर्ती उपभोग – गैरकारक आगत जिनका प्रयोग उत्पादक द्वारा आय वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में किया जाता है। उदाहरण: कच्चा माल, बिजली आदि। इस पर किया गया व्यय मध्यवर्ती उपभोग कहलाता है।
(iii) राष्ट्रीय आय की गणना –
बाजार कीमत पर सकल मूल्य वृद्धि (GDPMP) = उत्पादन का मूल्य – मध्यवर्ती उपभोग
– घिसावट व्यय (Depreciation)
– शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT)
+ विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय (NFIA)
राष्ट्रीय आय (NNPFC)

सावधानियां –
(i) पुरानी वस्तुओं के क्रय विक्रय को शामिल नहीं किया जाता।
(ii) पुरानी वस्तुओं पर दिया गया कमीशन या दलाली शामिल होती है।
(iii) मध्यवर्ती वस्तुओं के मूल्य को शामिल नहीं किया जाता।

अथवा

राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए : (a) आय विधि (b) व्यय विधि

मद रूपये करोड़ में
(i) कर्मचारियों का पारिश्रमिक 600
(ii) सरकारी अन्तिम उपयोग व्यय 550
(iii) विदेशों से प्राप्त निवल (शुद्ध) कारक आय -10
(iv) निवल निर्यात -15
(v) लाभ 400
(vi) निवल अप्रत्यक्ष कर 60
(vii) स्वनियोजित व्यक्तियों की मिश्रित आय 350
(viii) किराया 200
(ix) ब्याज 310
(x) निजी अन्तिम उपयोग व्यय 1000
(xi) निवल घरेलू पूंजी निर्माण 385
(xii) अचल पूंजी का उपयोग 85
(xiii) स्टाक में परिवर्तन 20

उत्तर –
(a)आय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय –

कर्मचारियों का पारिश्रमिक 600
किराया 200
ब्याज 310
लाभ 400
स्वनियोजित व्यक्तियों की मिश्रित आय 350
+
शुद्ध घरेलू आय (NDPFC) 1860
+ विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय +(-10)
राष्ट्रीय आय (NNPFC) 1850 करोड़ रुपए

 

(b) व्यय विधि द्वारा राष्ट्रीय आय –

निजी अन्तिम उपयोग व्यय 1000
सरकारी अन्तिम उपयोग व्यय 550
निवल घरेलू पूंजी निर्माण 385
निवल निर्यात +(-15)
+
बाजार कीमत पर निवल घरेलू आय (NDPMP) 1920
– शुद्ध अप्रत्यक्ष कर (NIT) -60
+ विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय +(-10)
राष्ट्रीय आय (NNPFC) 1850 करोड़ रुपए

 

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